ओ लाला मेरो
तू कैसो ढीठ कन्हाई।
पूरी और पकवान बनाए
गोकुल वासी भवन बुलाए
जन्मदिवस तेरो खीर बनाई
ओ लाला मेरो..
पूछ रहीं यशुमति मैया
बोलो प्यारे कृष्ण कन्हैया
तूने काहे को माटी खाई।
ओ लाला मेरो..
श्यामा गाय का दूध जमाया
माखन मिश्री भोग बनाया
रखी कटोरे मलाई।
ओ लाला मेरो...
बलदाऊ है सुघड़ सलोना
उसे ही दूँगी माखन लौना
मुझे भाए न तेरी चतुराई।
ओ लाला मेरो..
नंद बाबा तोहे बहुत बिगाड़े
तू ग्वाल बाल संग भागे दौड़े
मुख माटी लपटाई।
ओ लाला मेरो...
खोला मुख ब्रह्मांड दिखाया
देख यशोदा सिर चकराया
बेसुध होती माई।
ओ लाला मेरो...
लीलाधर की लीला अद्भुत
भाग्यशाली है पूरा गोकुल
कण-कण भेेद छुुुुपाई
भाग्यशाली है पूरा गोकुल
कण-कण भेेद छुुुुपाई
ओ लाला मेरो....
***अनुराधा चौहान'सुधी'***
सहज संवाद कान्हा से ... शायद यही खासियत है योगी राज की ...
ReplyDeleteलाजवाब रचना ... श्री कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक बधाई ....
हार्दिक आभार आदरणीय
Delete