Poet and Thoughts
Friday, October 25, 2019
गरल गरीबी का
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कीट के जैसी ज़िंदगी जीने को हैं मजबूर पल-पल गरल गरीबी का पीने को हैं मजबूर जूतों तले मसल जाते हैं पल भर में उनके सपने देखा ...
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Tuesday, October 22, 2019
दीप
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🕯️ है लघु दीपक तम हर रौशन घर दीपावली पर्व जगमग देहरी 🕯️ ये पर्व दिवाली ज्ञानज्योति मिटा अंधेरा अमावस ...
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Friday, October 18, 2019
दफ़न हो जाते सपने
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काँधे पर अनगिनत फरमाइशों का बोझ चिंता में तिल-तिल जलते और धुआँ होती ख्वाहिशें दफ़न हो जाते सपने दिन-रात यही सोच-सोचकर कैसे ...
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Monday, October 14, 2019
जल बिन तड़पती मीन
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कुछ पलछिन नैनों में बसे कुछ भीतर-बाहर भाग रहे कुछ अलमारी में छुप बैठे कुछ मेरी खुली किताब बने कुछ कब सावन की बन बदरी नयनों से बरसक...
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Friday, October 11, 2019
प्रेम के मुखौटे
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दिखावटी प्रेम के ओढ मुखौटे झूठ मुलाकातों के सिलसिले चले संवेदनाएं कहीं गुम सी होती बातों में मिसरी सा स्वाद घुले शर्तो के अनुबन्ध प...
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Saturday, October 5, 2019
बीत गए बरसों
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यादों की बदली-सी छाई ख्व़ाबों में दिखी इक परछाई आँखों में अश्रु थिरकने लगे मन के भावों ने ली अंगड़ाई हलचल-सी मची सीने में र...
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Friday, October 4, 2019
साँसों की सरगम
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मन वीणा के तार हो तुम धड़कन की आवाज़ हो तुम तुमसे ही यह ज़िंदगी है जीवन का हर साज हो तुम मुरझाया मन का रजनीगंधा खिल उठा जो त...
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