Poet and Thoughts
Wednesday, September 1, 2021
पिपासा
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पिपासा ज्ञान की मन में,विधाता आज तुम भर दो। अँधेरा दूर हो जाए,कृपा ऐसी जरा कर दो। मिटे मन मैल भी सारे,करे कुछ काम हम ऐसा। मिटे हर लालसा मन ...
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Friday, August 13, 2021
रिक्त पाती
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चाँद टीका नभ सजाए गीत गाए प्रीत के। देख शरमाई धरा भी धुन सुनाए रीत के। चाँदनी भी मौन ठिठकी बिम्ब देखा झील जो। राह का पत्थर सँवरता अब दिखात...
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Sunday, August 8, 2021
बूँदों की थिरकन
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अंक लपेटे बहता पानी भिगा रहा धरती आंचल प्रीत मेघ की बरस रही है अँधियारे का रच काजल। नृत्य दिखाती चपला गरजे चाँद देख यह छुप जाए। बूँदो की थि...
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Friday, August 6, 2021
वेदना के शब्द गहरे
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वेदना के शब्द गहरे भीत सिसके सुन कहानी। आँसुओं के बाँध तोड़े पीर बहती अब पुरानी। रंग सारे दूर भागे जब कलम ने फिर छुआ था। झूठ दर्पण बोलता कब...
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Thursday, July 22, 2021
अवसर
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आशाएं अब हाथ पसारे चलो ढूँढते शुभ कोना। दूषित मन की इस नगरी में बीज प्रेम का फिर बोना। अम्बर के आनन में बैठा उजास रवि अंतस करता। तमस मिटान...
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Friday, July 16, 2021
पलायन
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आग पेट की आज जलाए कलह मचाकर अति दुखदायन। संतोष मिटा मेटे खुशियाँ भूख बनी है ऐसी डायन। चूल्हे खाली हांडी हँसती अंतड़ियाँ भी शोर मचाए। तृष्णा...
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हाइकु-३
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1 भादों मध्यान्ह~ इंद्रधनुष देखता प्रेमी युगल। 2 बारात द्वार~ पंडाल में तैरते जूते-चप्पल। 3 हल्दी की रस्म~ पीली चिट्ठी टुकड़े वर के हाथ। 4...
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