Tuesday, July 24, 2018

गंगा तू बहती जा

गंगा तू बहती जा
कल कल गीत सुनाती जा
निच्छल निर्मल तेरी धारा
सबके जीने का तु सहारा
भागीरथ की तू भागीरथी
शिव की जटाओं से तू है बहती
जहां जहां से निकल कर आती
जीवन में रंग भरती जाती
तेरे मन में कोई बैर नहीं
तेरा अपना कोई शहर नहीं
पर्वतों से निकल कर आती
सागर में जाकर मिल जाती
गंगासागर तू कहलाती
सागर से तेरा मिलन अमर है
सबसे पावन यह तीरथ है
गंगा तू बहती जा
कल कल गीत सुनाती जा
***अनुराधा चौहान***


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