Thursday, October 25, 2018

दिल का सुकून


बना कर ऊंची हवेली
दिल का सुकून ढूंढ़ते हैं
खींच कर दिलों में लकीरें
मिलने की वजह ढूंढ़ते हैं
दफ़न हो रही प्रेम की दौलत
इन सजावटी दीवारों में
इस तो अच्छेे हैं वो 
जिनके घर छोटे होते हैं मगर
वो लोग दिल के अमीर होते हैं
बन जाती छोटी-छोटी खुशियां
उनके लिए एक त्यौहार
संकट में एक-दूजे साथ खड़े होते
सुख-सुविधा न हो पर दिल बड़ा रखते
छोटे से घर में भी
 मिलजुलकर रहता परिवार
प्रेम बरसता प्रतिफल वहां
होता शांति का आवास
कितने भी हो ऐशो-आराम
पर खुशियां नहीं मिलती
दिल को सुकून मिलता
अपनों के प्रेम से
***अनुराधा चौहान***


चित्र गूगल से साभार

10 comments:

  1. बहुत बहुत सुंदर आदरणिया अनुजा

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    1. बहुत बहुत आभार आदरणीय

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  2. बहुत सुंदर भाव रचना।
    सही कहा आपने सखी पैसे से भौतिक वस्तुएं खरीदी जा सकती है शांति और सुख नही।

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    1. बहुत बहुत आभार सखी आपकी सुंदर प्रतिक्रिया के लिए

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  3. जी नमस्ते,
    आपकी लिखी रचना हमारे सोमवारीय विशेषांक २९ अक्टूबर २०१८ के लिए साझा की गयी है
    पांच लिंकों का आनंद पर...
    आप भी सादर आमंत्रित हैं...धन्यवाद।

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    1. बहुत बहुत आभार श्वेता जी मेरी रचना को स्थान देने के लिए

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  4. बहुत ही सुन्दर भावप्रवण रचना....
    वाह!!!!

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