Poet and Thoughts
Sunday, November 24, 2019
दर्द चीख कर मौन हो गया
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दर्द चीख कर मौन हो गया, हृदय हो गया बेचारा। दर-बदर की ठोकर खाता, फिरता है मारा-मारा। निशब्द है भंवरों की गुँजन, दर्द तड़पे...
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Saturday, November 23, 2019
जीवन की साँझ
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साँझ हुई जीवन की जबसे भोर बोझिल-सी हो गई महकती थी सुमन से बगिया बंजर-सी वो हो गई प्रेम के अहसास जो छिटके ओस की तरह गुम हुए ...
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Wednesday, November 20, 2019
सृष्टि की संचालिकाएं
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उतरी धरा पर सोचती मैं हूँ कौन देख इन्हें सबकी खुशियाँ मुरझाई देखकर रहते सबके चेहरे मौन बेटी हूँ घर की नहीं कोई पराई बोझ मत समझ...
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कब पलट जाए किस्मत
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नशा जवानी का सिर चढ़ता है घर समाज तब कहांँ दिखता है मौज-मजे में झूमते हैं फिर लोग लगा बैठते फिर नशे का रोग दीन-हीन रहते कदमों ...
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Monday, November 18, 2019
अंतिम पड़ाव
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जिम्मेदारी के बोझ तले ख्व़ाहिशें दम तोड गईं बढ़ती रहीं चेहरे पे सिलवटें निशानी उम्र की दे गईं दो से शुरू किया सफ़र संग ...
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Friday, November 15, 2019
मौन से संवाद
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मौन ही करता रहा मौन से संवाद स्वप्न नये गढ़ता रहा खुद के दरमियान छूकर गुजरती हवा राग कुछ छेड़ती शब्द की खामोशी को छेड़...
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Sunday, November 10, 2019
कदमों की आहट
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तेरे आने की आहट से हवाओं में सरगम गूँज उठी बालों की लट झूमी लहराई हौले से गालों को चूम गई पवन झकोरे झूम-झूम के संदेशे तेरे सुनाने लगी मैं...
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