Friday, March 13, 2020

साथी जन्मों के

भूले से कभी भूल हो
तो भूल नहीं जाना।
साथी मेरे जन्मों के
मेरा साथ निभाना।

इस दिल की गहराई में
बस धड़कन ये कहती।
बदले मौसम तुम बदले
ये पायल भी कहती।
हौले बहती पुरवाई
नवगीत गुनगुनाना।
भूले से कभी भूल हो
तो भूल नहीं जाना।

साथी मेरे जन्मों के
मेरा साथ निभाना।

चूड़ी खनकी खन से ये
बिंदिया है दमकती।
सुन-सुन ये बातें सखियाँ 
छुप-छुपकर हैं हँसती।
पलछिन बीते दिन रातें
सुन के नया बहाना।
भूले से कभी भूल हो
तो भूल नहीं जाना।

साथी मेरे जन्मों के
मेरा साथ निभाना।

छोटी-छोटी बातों को
मन में कभी न रखना।
जीवन में कड़वे-मीठे
अनुभव सब हैं चखना।
मन में कोई बाते ले
यूँ हीं रूठ न जाना।
भूले से कभी भूल हो
तो भूल नहीं जाना।

साथी मेरे जन्मों के
मेरा साथ निभाना।।
***अनुराधा चौहान***
चित्र गूगल से साभार

15 comments:

  1. छोटी-छोटी बातों को,
    मन में कभी न रखना।
    जीवन में कड़वे-मीठे,
    अनुभव सब हैं चखना।
    मन में कोई बाते ले,
    यूँ हीं रूठ न जाना।
    भूले से कभी भूल हो,
    तो भूल नहीं जाना।
    बहुत सुंदर मनभावन सृजन सखी , सादर नमन

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  2. बहुत गहरी बात आपने गीत के माध्यम से कह दी👏👏👏👏👏👏सुन्दर गेयता लिए हुये एक आदर्श नवगीत👌👌👌👌

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  3. प्रेम भाव और मन की कोमल भावनाओं के साथ बनी सुंदर रचना ... दिल में उतरती हुई ...

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    1. हार्दिक आभार आदरणीय

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  4. आप बिम्ब और प्रतीक के माध्यम से सपाट कथन से बचते हुए सुंदर सृजन कर रही हैं बधाई

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    1. हार्दिक आभार आदरणीय

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  5. जी नमस्ते,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा शुक्रवार (20-03-2020) को महामारी से महायुद्ध ( चर्चाअंक - 3646 ) पर भी होगी।
    आप भी सादर आमंत्रित हैं।
    *****
    आँचल पाण्डेय

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  6. सही है,
    साजन का रूठना बैचैन कर देता है.
    थोड़ी सी या पल भर की दूरी सही नही जाती.
    सचे प्रेम में ही गिले शिकवे होते हैं...ये बात जान जाये वो ही सचा प्रेम होता है.
    लाजवाब.

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    1. हार्दिक आभार आदरणीय

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  7. बहुत अच्छी प्रस्तुति

    Mere blog par aapka swagat hai.....

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  8. वाह बहुत सुंदर लेखन अनुराधा जी।

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    1. हार्दिक आभार श्वेता जी

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  9. जीवन में कड़वे-मीठे,
    अनुभव सब हैं चखना।
    मन में कोई बाते ले,
    यूँ हीं रूठ न जाना।
    भूले से कभी भूल हो,
    तो भूल नहीं जाना।
    बहुत सुन्दर सृजनात्मकता सखी 👌👌👌👌

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