Poet and Thoughts

Tuesday, September 10, 2019

यादों की पोटली

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आज़ मुद्दतों बाद खोली यादों में बंद रिश्तों की पोटली धूप दिखाने रखती यहाँ वहाँ सहेजकर सीली यादों को तभी खन्न से गिरी चिल्लर...
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Monday, September 9, 2019

अहम के शिकार

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अपने अहम के शिकार हुए अब सबसे अलग-थलग बैठे अहंकारी व्यक्ति का जीवन बस अकेलेपन में ही बीते है जब तक रहता माल जेब में चापलूस कई ...
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Friday, September 6, 2019

जिंदगी

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ज़िंदगी तो वही जीते हैं जो हर हाल में खुश हैं रो-रोकर जिए तो क्या जिए बस दुःख की माला पहनते रहे सब सुख भला किसको मिला किसी...
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Sunday, September 1, 2019

चार सौ बीसी

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चार सौ बीसी बड़ी बीमारी बड़ों-बड़ों लगे यह प्यारी शर्म को करके दाएं-बाएं इसकी टोपी उसे पहनाएं गरीब को लूटे नोंच-नोंचकर साफ किए...
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Saturday, August 31, 2019

जीवन यात्रा

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जन्म लेते ही शुरू होती जीवन की कठिन यात्रा चार लोगों से रिश्ते में बंधे घर में संस्कारों को संमझते सीख लेने ज़िंदगी की पहली बा...
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Wednesday, August 28, 2019

शून्य

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शून्य से आए हैं शून्य में समा जाएंगे शून्य के रहस्य को हम फिर भी न समझ पाएंगे शून्य में ब्रह्म छुपा शून्य है परमात्मा अनेक...
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शर्तों पर ज़िंदगी

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शर्तों के धागों में उलझती जाती ज़िंदगी चाहे -अनचाहे पलों को जीने को मजबूर बालपन से ही   टाँक दी जाती है जीवन जीने की शर्तें  ...
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मेरे ब्लॉग पर लिखी रचनाएं मेरी स्वरचित रचनाएं हैं जो मेरे मन की भावनाएं व्यक्त करती हैं

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Anuradha chauhan
शब्दों का ताना-बाना बुनती हूँ। भावों के रंग भरती हूँ।बस इतनी सी पहचान है मेरी वही पहचान लिखती हूँ।
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