Poet and Thoughts
Saturday, June 27, 2020
काली बदली
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उमड़-घुमड़ के काली बदरी नीले अम्बर को घेरे शीतल ठंडी पवन मचलती घिरते हैं मेघ घनेरे। नयन आस से देख रहे हैं कब ये बदली बरस...
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Tuesday, June 16, 2020
मौन बोलता है
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अँधियारे आँगन आ बैठा अंतस मौन बोलता है। नीर नयन गालों पे ढुलके गहरे राज खोलता है। सन्नाटे की चादर ओढ़े रात अँधेरा गहराता। ...
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Sunday, June 14, 2020
बरखा की बूँदे
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थिरक उठी बरखा की बूँदे झूम रहे हैं तरु सारे। चपल दामिनी चमक चमक कर क्या जाने किसे निहारे। भीगा आँचल आज धरा का राग छेड़ती पुर...
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Wednesday, June 10, 2020
मोबाइल नशा
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लगी है बीमारी बड़ी आज भारी नयी नस्ल देखो मोबाइल की मारी माँ-बाप,बेटे सभी घर में बैठे मोबाइल के मारे रहे ऐंठे-ऐंठे न माता की ...
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Thursday, May 28, 2020
बूँद-बूँद जीवन
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बूँद-बूँद जब जल की गिरती घड़ा एक नित भरता। नाम गूँजता जग में उसका कारज जग हित करता। गले लगाना है अपनों को उचित नहीं ये दंगा...
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जीवन का आधार
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भाव हृदय का बहता झरना जीवन का आधार लिये। जीवन पथ के चलते राही हृदय प्रीत साकार किये। हृदय बसा आशा की किरणें मन उजियारा करना...
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Tuesday, May 26, 2020
राज नये गहरे-गहरे
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भावों के पट खोल रहे हैं राज नये गहरे-गहरे। अंतर्मन में जीवन के कुछ यादों के पल आ ठहरे। धूप खिली है सोंधी-सोंधी भीतर मन के अँ...
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