Poet and Thoughts

Tuesday, May 25, 2021

वेदना का शोर

›
भोर को रूठा हुआ-सा देख सूरज ढल गया। मौन चंदा बादलों में क्षीण होकर छुप गया। याद की गठरी गिरी फिर स्वप्न सिसके सब निकल। मिट गया शृंगार जब रोई...
16 comments:
Monday, May 24, 2021

मुरझाईं फिजाएं

›
  पूँछता है मौन अम्बर बोल तांडव थाप क्यों। लीलती है मौत खुशियाँ हर गली में आज क्यों। रौनकें फीकी हुई क्यों आरज़ू मरती दिखे। साँस का सौदा मचा...
9 comments:
Wednesday, May 12, 2021

जहरी हवा

›
 काल भीषण रूप धरकर आज धरती पे रुका। मौत का तांडव मचा फिर दंड से मानव ठुका। हो गई जहरी हवा अब बाँध चले मुखपट्टी। पीर ये कैसे भुलाएं  दे रही य...
13 comments:
Sunday, May 9, 2021

माँ

›
 माँ  तेरे लिए कुछ लिखने चलूँ तो शब्द कम पड़ जाते हैं माँ इस  छोटे अल्फाज़ में सारे सुख  सिमट जाते है माँ तू खुद में पूर्ण है धूप में शीतल छ...
17 comments:
Wednesday, April 21, 2021

सोच का चक्रव्यूह

›
 जिस धरती ने हमें जीवन दिया आज उस धरती पर  हमारी निगेटिव सोच ने ही वायरस को जन्म देकर हमें पॉजिटिव और निगेटिव के चक्रव्यूह में फंसा दिया और ...
16 comments:
Sunday, April 18, 2021

चीखती परछाइयाँ

›
रात की कालिख लपेटे शून्यता कहे कहानी। फिर बिखरती आस पूछे पीर यह कैसी पुरानी। गूँजती अब मौन चीखें आह का क्रंदन सुनाती। हर गली में मौत से डर श...
16 comments:
Sunday, April 4, 2021

सत्य यही है

›
  कोमल निर्मल मन,लगे खरा है। तप्त धरा जैसे,वृक्ष हरा है। मिथ्या है जीवन,लड़ मत प्राणी। कहना न किसी से,कड़वी वाणी। काया की माया,मिली धरा है। ...
14 comments:
‹
›
Home
View web version

मेरे ब्लॉग पर लिखी रचनाएं मेरी स्वरचित रचनाएं हैं जो मेरे मन की भावनाएं व्यक्त करती हैं

My photo
Anuradha chauhan
शब्दों का ताना-बाना बुनती हूँ। भावों के रंग भरती हूँ।बस इतनी सी पहचान है मेरी वही पहचान लिखती हूँ।
View my complete profile
Powered by Blogger.