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Monday, December 3, 2018

साया साथ न छोड़ें


जब तक जीवन
चलता जाए
साया साथ न छोड़ें
जाने कितने रूप रंग में
जीवन में रंग जोड़े
पैदा होते ही मिला मुझे
माँ के आंचल का साया
लाड़ प्यार से जिसने
मेरा ज़ीवन है चमकाया
धीरे-धीरे बढ़े हुए तो
पिता बने फिर साया
जीवन की हर 
धूप-छांव में मुझको
चलना सिखाया
फिर मिला मुझे जीवन में
साया हमसफ़र का
बड़ा सुहाना बना दिया
सफ़र उसने जीवन का
खुद का साया
साथ तभी तक
जब तक यह जीवन है
साया रूठा जीवन टूटा
साया का भी जीवन है
***अनुराधा चौहान***

10 comments:

  1. आपकी लिखी रचना आज "पांच लिंकों का आनन्द में" बुधवार 5 दिसंबर 2018 को साझा की गई है......... http://halchalwith5links.blogspot.in/ पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!



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    1. बहुत बहुत आभार पम्मी जी मेरी रचना को स्थान देने के लिए

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  2. बहुत सुंदर भावपूर्ण रचना अनुराधा जी।

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    1. बहुत बहुत आभार श्वेता जी

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  3. वाह बहुत सहज सरल अभिव्यक्ति सखी ।
    अप्रतिम।

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  4. सचमुच एक साया ही होता हैं जो ताउम्र इंसान का साथ नहीं छोड़ता। बहुत सुंदर अभिव्यक्ति, अनुराधा दी।

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    1. बहुत बहुत आभार ज्योती जी

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  5. बहुत खूब अनुराधा जी , सच में साए का भी जीवन है

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    1. जी बहुत बहुत धन्यवाद 🙏

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