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Tuesday, May 25, 2021
वेदना का शोर
Monday, May 24, 2021
मुरझाईं फिजाएं
पूँछता है मौन अम्बर बोल तांडव थाप क्यों।
लीलती है मौत खुशियाँ हर गली में आज क्यों।
रौनकें फीकी हुई क्यों आरज़ू मरती दिखे।
साँस का सौदा मचाए यह रुदन का साज क्यों।
बढ़ रही मायूसियों के कौन रोके काफिले,
आज मानव आ रहा इंसानियत से बाज क्यों।
चीखती खामोशियों में गुल धुनें हैं प्यार की।
बंद कमरों में दफन हैं धड़कनों के साज क्यों।
आज मुरझाई फिजाएं झूमती गाती नहीं।
बोल दो मन की व्यथा सबसे छुपाती राज क्यों।
©® अनुराधा चौहान'सुधी'✍️
चित्र गूगल से साभार
Wednesday, May 12, 2021
जहरी हवा
Sunday, May 9, 2021
माँ
Wednesday, April 21, 2021
सोच का चक्रव्यूह
Sunday, April 18, 2021
चीखती परछाइयाँ
Sunday, April 4, 2021
सत्य यही है
खुशियाँ जीवन की,करके हल्की।
कर्मों की गठरी,भरके छलकी।
भूल गए क्या सच,हृदय मरा है।
कोमल...
मिट जाता जीवन,करते अनबन।
मिलते आपस में,क्यों सब बेमन।
पड़ी काल छाया,जीव डरा है।
कोमल...
रिश्तों की डोरी,कसकर पकड़ो।
गाँठ नहीं अच्छी,जमकर जकड़ो।
मधुर वचन से ही,प्रेम झरा है।
कोमल..
©® अनुराधा चौहान'सुधी' स्वरचित ✍️
चित्र गूगल से साभार






