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Thursday, June 17, 2021

झूठ के रूप


जब झूठ भरी यह बोलियाँ
हृदय चुभोती तीर।
अंतस लेकर फिर वेदना
सत्य हुआ गम्भीर।

जब माया बनकर मोरनी
चल इठलाती चाल।
झूठों की वर्षा जब हुई
नाचे ता ता ताल।
मानवता खोती देख के
अम्बर खोता धीर।अंतस...

रूप झूठ के पहचान ले
ऐसे किसके नैन।
आत्माएं बिकती देख के
चुपके बीते रैन।
घर की भीत मौन हो चुकी
नींव बहाए नीर।अंतस...

ये जीवन की है पोटली
लिपटे हैं सब राज।
कागज से रिश्तों तोलकर
आते कब यह बाज।
प्रीत भरी थाली फेंक कर
विष घोल रहे खीर।अंतस....
*अनुराधा चौहान'सुधी'✍️*

चित्र गूगल से साभार

14 comments:

  1. Replies
    1. हार्दिक आभार शिवम् जी

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  2. बहुत सुंदर

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    Replies
    1. हार्दिक आभार आदरणीय

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  3. ये जीवन की है पोटली
    लिपटे हैं सब राज।
    कागज से रिश्तों तोलकर
    आते कब यह बाज।
    प्रीत भरी थाली फेंक कर
    विष घोल रहे खीर।

    अति सुंदर सृजन

    सादर

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    Replies
    1. हार्दिक आभार आदरणीय

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  4. वाह! क्या ख़ूब कहा सखी।
    खरा-खरा ।
    सादर

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  5. ये जीवन की है पोटली
    लिपटे हैं सब राज।
    कागज से रिश्तों तोलकर
    आते कब यह बाज।
    प्रीत भरी थाली फेंक कर
    विष घोल रहे खीर।

    सुंदर सृजन सखी, सादर नमन आपको

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    1. हार्दिक आभार सखी 🌹

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  6. हार्दिक आभार सखी 🌹

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  7. जीवन दर्शन से ओतप्रोत भावपूर्ण सुंदर रचना।

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    1. हार्दिक आभार जिज्ञासा जी।

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  8. बहुत सुंदर प्रस्तुति।

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    Replies
    1. हार्दिक आभार आदरणीय

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