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Thursday, August 8, 2019

नया सबेरा

सुनहरे अश्वो के रथ पर सवार
आए भास्कर सुनहरी रश्मियों के साथ
कलियों ने उतारा ओस का घूँघट
अंगड़ाई ले इठलाती फूल बन मुस्काई
सूर्य रश्मियों ने जीवन को छुआ
प्रकृति का खिलखिलाया हर कोना
जीवन की सुगबुगाहट तेज हुई
ज़िंदगी अपनी मंज़िल की ओर दौड़ पड़ी
अंशुमाली धीरे-धीरे बीच अंबर पे आया
खिली-खिली धूप ने जग को नहलाया
प्रकृति खुलकर मुस्कुराने लगी
लो सांझ भी अब पास आने लगी
भानु समेटने लगे अपना बसेरा
रश्मियों ने समेट लिया आँचल अपना
फिर आएंगे भानु लेकर नयी भोर
चिड़ियों का बंद हुआ चहकने का शोर 
सांझ के आते ही दे गए फिर से अंधेरा
कल भास्कर के साथ आएगा नया सबेरा
***अनुराधा चौहान***

चित्र गूगल से साभार

12 comments:

  1. बहुत सुंदर काव्यात्मक, अलंकारों से सुसज्जित रचना।

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  2. बहुत सुंदर रचना सखी।

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  3. Replies
    1. हार्दिक आभार ऋतु जी

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  4. जी नमस्ते,

    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (11-08-2019) को " मुझको ही ढूँढा करोगे " (चर्चा अंक- 3424) पर भी होगी।


    --

    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।

    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    आप भी सादर आमंत्रित है

    ….

    अनीता सैनी

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  5. बहुत सुन्दर...
    सांझ के आते ही दे गए फिर से अंधेरा
    कल भास्कर के साथ आएगा नया सबेरा
    वाह!!!

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  6. अद्भुत, अप्रतिम शब्द-विन्यास ,सहज प्रवाहित लय और भाव अति उत्तम उत्कृष्ट साहित्यिक सृजन अनुराधा जी...

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    Replies
    1. हार्दिक आभार आदरणीय

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