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Saturday, March 9, 2019

दौलत के फेर में

दुनियाँ दीवानी दौलत की
यह दौलत है जो दिल तोड़े
दौलत ही अब रिश्ते जोड़े
दौलत की मची है मारामारी
भ्रष्टाचार बना रहा है बीमारी
दौलत, शौहरत है सबकी चाहत
इसके आगे मर रही इंसानियत
अब उसका पलड़ा भारी है
जिस पर लक्ष्मी की मेहरबानी है
हर जगह चल रहे घोटाले
कुछ भी कैसे भी 
बस पैसा हैं कमाने
इंसान भूल रहे अपना प्यार
खड़ी हो रही दौलत की दीवार
दौलत का भूत सिर पर सवार
माँ-बाप का खर्च नहीं बर्दाश्त
अब दौलत से ही रिश्ते बनते
दौलत से ही रिश्ते बिगड़ते
पैसे कमाने की होड़ मची है
हमसे बेहतर कोई नहीं है
फ़ुरसत के पल पास नहीं
बच्चों का बचपन भी याद नहीं
पर पैसे का पल-पल का हिसाब सही
दौलत की भूख कभी मिटाए न मिटे
ज़िंदगी बीतती जाती दौलत के फेर में
***अनुराधा चौहान***

पहचान

चूड़ी बिंदिया कुमकुम पायल
नारी के जीवन श्रृंँगार बना
जिसकी खातिर हमेशा नारी ने
अपने सपनों को बलिदान दिया
जकड़ी रही हरदम वो
रिश्ते-नाते की जंजीरों में
पर झुकी नहीं टूटी नहीं
डटकर चुनौतियों से लड़ती रही
रीति-रिवाज की तोड़ बेड़ियाँ
ज्यों ही उसने दहलीज लांघी
अपने बुलंद हौसले से जल्दी
दुनियाँ में अपनी पहचान बना ली
क्या धरती क्या अंबर
वो अंतरिक्ष में भी जा पहूंँची
गृहकार्य हो या रणभूमि
नारी शक्ति की जय गूंजी
नहीं डरती आज की नारी
वो तो मिराज विमान उड़ा आई
दुश्मन के घर में घुसकर
आतंकियों को मार गिरा आई
नारी ने अपनी पहचान बनाई 
आज की नारी सब पर भारी
वो अब किसी से नहीं डरने वाली
वो अगर जन्मदात्री है अन्नपूर्णा है
तो दुर्गा है काली कल्याणी है
***अनुराधा चौहान***

Wednesday, March 6, 2019

मैं ही प्रलय हूँ

बसंत की बहार हूँ
फागुन की धूप हूँ
मधुमास का प्यार 
और होली का रंग हूँ
आकाश का मौन हूँ 
पंछियों का कलरव हूँ
लय बद्ध गीत हूँ
हवा का झोंकें में
जीवन की सरगम हूँ
फागुन बसंत मै
 रंगों से सराबोर हूँ
भोर के आँगन में 
बिखरी हुई धूप हूँ
आँखों में लगे काजल-सी 
गहरी काली रात हूँ
बादलों के आँगन में 
 तारों की झिलमिलाहट हूँ
समंदर की लहरों 
का छुपा हुआ क्रौध हूँ
चाँद की मैं चाँदनी
मैं ही ओस की बूँद हूँ
पतझड़ का सूनापन
 बरखा की बहार हूँ
मैं प्रकृति का अद्भुत
अनुपम सौंदर्य हूँ
धरती हूँ आकाश हूँ 
हवा मैं पानी मैं
मुझसे ही ज़िंदगी है 
हाँ मैं सृष्टि हूँ 
सहेज लो समेट लो 
मुझको सँवार लो
बिखर गया रूप तो
मैं ही प्रलय हूँ
***अनुराधा चौहान***

Tuesday, March 5, 2019

ग़रीब की ज़िंदगी

दिन बीता रात गहराई
मजबूरी की फिर बिछी चारपाई
चिंता की ओढ़कर चादर
आँखों में नमी है छुपाई

बच्चों के मन को बहलाते
बातों के फिर बताशे बनाकर
कल खिलाएंगे दूध-मलाई
मुश्किल से रोककर रुलाई 

नींद आँखो से कोसो दूर
ग़रीबी को कोसते होकर मजबूर
होंठों पर मीठे लोरी के सुर
बच्चों को बहलाते फुसलाते

हिसाब की गठरी को
खोलते बांधते कटती रातें
कभी मजदूरी तो कभी मजबूरी में
कट ही जाती गरीब की ज़िंदगी
***अनुराधा चौहान***
चित्र गूगल से साभार

Saturday, March 2, 2019

शिव विवाह

चले भोले भंडारी
विवाह रचाने
तन पर भस्म लपेटे
सिर पर जटाएं बांधे
सर्पों की पहनें
गले में मालाएं
रूप अनोखा है
भोले बाबा का
चोड़ा है ललाट
कमर में
पहनें मृगछाल
कर बैल पर सवारी
आए भोले भंडारी
बलशाली काया
बाबा त्रिनेत्र वाला
देख रूप उनका
मूर्छित होती माता
कोमल सुकुमारी
कन्या मेरी गौरी
कैसे जोगी से
विवाह रचाने चली
औघड़ दानी है यह
जटा जूट धारी यह
भूत प्रेत
जिसके हों संगी साथी
बिच्छु,सर्प,बैल
चलत शोर करें
अज़ीब बाराती लेकर
साथ में नाचें
डम-डम-डम
डमरू बाजे
डरे देख जन सारे
यह वर है कैसा
जिसका तो है
रूप भयंकर
समझ नहीं पाए
लीला यह कोई
यह देवों के देव
हैं शिवशंकर
भयभीत नयन
देख मुस्काए
बदला महादेव ने
रूप अनूपम
छवि आलौकिक
देख कर सारे
हो रहे अभिभूत
महादेव के
विवाह के कराने
विधि ने रचा विधान
सोलह श्रृंँगार
कर आई पार्वती
मंत्र-मुग्ध सब देखें
मात छवि मोहनी
शुरू हुई शिव-शक्ति की
विवाह की विधि
देवगण पुष्प
बरसाते प्रसन्नचित
सृष्टि का कण-कण
हुआ हर्षित
सम्पूर्ण हुईं
विवाह की विधि
शिव की बनी
गौरी अर्द्धांगिनी
***अनुराधा चौहान***

Friday, March 1, 2019

काश न होती यह सरहदें

छूना न पाए सरहद कोई
मर-मिट जाते हैं वीर सपूत
सरहद की रखवाली करते
दुश्मन को करते चकनाचूर

वतन की खातिर ही जीते हैं
वतन की खातिर मिट जाते
देखें कोई आँख उठाकर
उसके लिए काल बन जाते

गर्व हमें हैं इन वीरों पर
अद्भुत इनकी मिशाल है  
 ढाल बने और खड़े हुए हैं
सरहद पर वीर जवान है

 वतन की शान की खातिर
बहा देते लहु अपना
सरहद पर सदा लहराए
तिरंगा के बसाए सपना

काश ना होती यह सरहदें
नफ़रतें बढ़ाती हैं यह सरहदें
बांटती है दिलों को सरहदें
इंसानों को बांटती है यह सरहदें

खींच कर लकीरें दिलों में
जातियों में बांटती सरहदें
कभी धर्म के नाम कभी जाति नाम
हमें आपस में लड़वाती सरहदें
***अनुराधा चौहान***

हमारी मातृभूमि

🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳
मातृभूमि है जान हमारी
मातृभूमि की शान निराली
मातृभूमि की रक्षा के लिए
वीरों ने दी हरदम कुर्बानी

मातृभूमि की आजादी के लिए
वीरों ने सदा संग्राम किया
राजगुरु,सुखदेव,भगत सिंह
आज़ाद जैसे वीरों ने जन्म लिया

मातृभूमि की माटी चंदन
मातृभूमि तेरा नित वंदन
जन्म लिया है इस माटी में
वीरों के वीर है अभिनंदन

कान खोल कर सुन लो
वीरों की ललकार को
आँख उठा कर ना देखना
भारत की आन-बान-शान को

मातृभूमि के वीर जवान थे
जो कारगिल युद्ध में विजय हुए
इसकी माटी पावन है इतनी
राम, कृष्ण भी यहीं जन्म लिए

देवभूमी यह कर्मभूमि यह
हमारी प्यारी मातृभूमि यह
शान में इसकी जान भी देंगे
वीरों की जननी है यह

माटी में वीरों का लहु मिला
कण-कण इसका पावन है
करो तिलक इस माटी से
यह माटी नहीं यह चंदन है

मातृभूमि की सेवा करना
हर भारतीय का फर्ज है
इस धरती पर हमने जन्म लिया
इसकी रक्षा करना हमारा धर्म है
***अनुराधा चौहान***
चित्र गूगल से साभार