शीतल रातें
ढोलक पर
पड़ती
जब थापें
मधुर मिलन के
गीत गाती
गुजरिया
झूम झूमकर
नाचें
बातें प्रीत की
करनी हैं बाकी
चाँद तारे बने
हमारे साक्षी
क्यों सजनी
तू शरमाए
चलो हम गीत
मिलन के गाएं
ठंडी सर्द
हवाओं में
सुंदर मस्त
फिज़ाओं में
आ तुझको
मैं प्यार करूं
आ तेरा
श्रृंगार करूं
मैं ले आया
यह सुंदर हार
जो बने तेरे
गले का श्रृंगार
आ तुझको
पहना दूं प्रिय
दिल का हाल
सुना दूँ तुझे
यूं चुप न बैठो
कुछ तो कहो
कुछ मेरे संग
सपने बुनो
तू मेरी मैं
तेरा प्रिय
कहीं बीत
न जाए
रैना प्रिय
आ तुझको
सीने से लगाकर
अपने दिल में
तुझे बसाकर
आओ लिखे
आज़ प्रेम-कहानी
जिसके हम हों
राजा-रानी
***अनुराधा चौहान***(चित्रलेखन)






