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Monday, January 21, 2019

हे कृष्ण

कहां छिपे हों गिरधर नागर
नदियां सूखी रीति गागर
मानवता की सुन लो पुकार
बढ़ा चहुं ओर अत्याचार

दर्शन दो श्री बनवारी
कहां छिपे हों कृष्ण मुरारी
त्राहि-त्राहि करे जनता सारी
बढ़ गए चहुं ओर भ्रष्टाचारी

आओ अब सुदर्शन धारी
चैन पड़े न अब गिरधारी
बढ़ गए चहुं ओर दुराचारी
कृपा करो श्री बनवारी

मासूम हंसी मुरझाने लगी हैं
कलियां खिलते ही मरने लगी हैं
इससे भी ज्यादा बुरा क्या होगा
जब नारी का जीवन न होगा

सबके कष्ट मिटाने वाले
मनमोहन मुरलिया वाले
धरती की संताप हरो तुम
लेलो अब अवतार हे कृष्ण
***अनुराधा चौहान***


चित्र गूगल से साभार

8 comments:

  1. बहुत बहुत आभार आपका

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  2. अनुराधा जी !
    भगवान को पुकारने और गुहारने के दिन गुज़र गए. अब तो हमको अपन भाग्य बदलने के लिए ख़ुद ही सब कुछ करना होगा. दैन्य-भाव से भगवान की कृपा के लिए गिड़गिड़ाते सूरदास को कुछ नहीं मिला फिर वो ताल थोक कर बोले -
    'आज हौं, एक-एक करि टरिहों,
    कै हमहीं, कै तुम्हीं माधव,
    अपने भरोसे लरिहौं.'
    फिर उन्हें सदा-सदा के लिए माधव की कृपा और उनका प्रेम, दोनों ही मिल गए.

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    1. जी बहुत बहुत आभार आदरणीय

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  3. बहुत सुन्दर आदरणीया
    सादर

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  4. व्यथित मन की गुहार ..
    अब तो माधव मोहे उबार ..

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    1. बहुत बहुत आभार नुपुर जी

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